रासबिहारी पाण्डेय की शोध पुस्तक’मानस की अंतर्कथायें’ पर परिचर्चा


मुंबई। रामकथा हर दौर में प्रासंगिक रही है किंतु वर्तमान पीढ़ी मानस की अंतर्कथाओं से अपरिचित है,ऐसे में मुद्रित रूप में इन कथाओं की प्रस्तुति अत्यंत उपयोगी है।उक्त विचार नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा साहित्यिक संस्था रसराज द्वारा आयोजित रासबिहारी पांडे की शोध पुस्तक रामचरितमानस की अंतर कथाएं पर आयोजित परिचर्चा एवं कवि सम्मेलन में बोलते हुए काशी विद्यापीठ के पूर्व आचार्य डॉ.सत्यदेव त्रिपाठी ने उपरोक्त बातें कही।प्रख्यात अभिनेता पं.विष्णु शर्मा ने कहा कि युग की आवश्यकता के अनुसार मानस में अंतर्निहित शिक्षाप्रद कथाओं की संक्षिप्त प्रस्तुति के लिए लेखक अभिनंदन के पात्र हैं। हर कहानी चिंतन की मांग करती है, जिससे शिक्षा लेकर हम अपने जीवन की समस्याओं से निदान पा सकते हैं। भारतीय सद्विचार मंच के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. राधेश्याम तिवारी ने कहा कि सद्विचार मंच से वे इसकी प्रतियों का वितरण करेंगे। उन्होंने अन्य संस्थाओं से भी आग्रह किया कि वे अपने पदाधिकारियों को उपहार के रूप में यह पुस्तक प्रदान करें ताकि सनातन संस्कृति का अधिकाधिक प्रसार हो सके।परिचर्चा का संचालन कर रहे नरसिंह के दुबे चैरिटेबल ट्रस्ट के निदेशक डॉ.ओमप्रकाश दुबे ने कहा कि प्रस्तुत कथाएं इतनी रोचक हैं कि आप एक बैठक में ही इन्हें पढ़ जाना पसंद करेंगे।

ये कथायें मानव जीवन के लिए मशाल की तरह हैं।लेखक रासबिहारी पांडेय ने कहा कि कई पौराणिक ग्रंथों का पारायण करने के बाद इन कथाओं को संकलित करना संभव हो सका। शोधकर्ताओं और कथावाचकों के लिए संदर्भ ग्रंथ के रूप में यह विशेष उपयोगी सिद्ध होगा।परिचर्चा के बाद आयोजित कवि सम्मेलन में दर्जनाधिक कवियों ने विभिन्न रसों की कविताओं का पाठ किया।आगत अतिथियों एवं कवियों का स्वागत नरसिंह के.दुबे चैरिटेबल हॉस्पीटल के ट्रस्टी जयप्रकाश दुबे ने किया।
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Author: VS NATION