शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के महाप्रयाण से राष्ट्र और धर्म के क्षेत्र में बड़ी रिक्ति उत्पन्न हो गई-आचार्य भारतभूषण


दिल्ली, द्वारका-ज्योतिष द्वय पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी सरस्वती जी महाराज के ब्रह्मलीन होने पर अखिल भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य भारतभूषण पाण्डेय ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका अभाव सनातन धर्म और राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति तथा बहुत बड़ी रिक्ति है।आज सायंकाल ४बजे के लगभग उन्होंने ९९वर्ष की आयु में नश्वर शरीर का परित्याग किया। आचार्य पाण्डेय ने कहा कि स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज के अनन्य कृपापात्र, रामराज्य परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी थे। १९४२ में भारत छोड़ो आन्दोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी तथा जेल में बन्द थे। गोरक्षा, श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आन्दोलन, गंगा की अविरलता-निर्मलता तथा श्रीराम सेतु की रक्षा जैसे अनेक आन्दोलन उन्होंने सफलतापूर्वक संचालित किये। वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा, सेवा और रोजगार के लिए अनेक प्रकल्प पूज्य महाराज श्री ने चलाये। आचार्य पाण्डेय ने कहा कि उनके द्वारा स्थापित सनातन धर्मसंसद् जिसमें देश के सभी संसदीय क्षेत्रों, वैदिक सम्प्रदायों तथा विचारों व पंथों के प्रतिनिधि शामिल हैं, में विश्व के कल्याण और राष्ट्र के सर्वांगींण उन्नयन के लिए प्रेरक चर्चा और मार्गदर्शन प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि पूज्य महाराज श्री उच्च कोटि के महात्मा, साधक और वक्ता थे तथा ९९ वर्ष की आयु में भी सक्रिय थे। सभी विषयों पर सुस्पष्ट और सुलझे हुए विचार देने वाले मूर्धन्य विद्वान् और मनीषी के साथ-साथ द्वारका-शारदा पीठ और बदरिकाश्रम ज्योतिष् पीठ के उभय पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में उनकी कीर्ति तथा उनके कार्य वैदिक सनातन धर्मियों के लिए प्रेरणा और प्रकाश प्रदान करते रहेंगे एेसी आशा व्यक्त करते हुए आचार्य भारतभूषण पाण्डेय ने भावभीनी श्रद्धांजलि व्यक्त की है।

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Author: VS NATION