सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास के साथ सबका प्रयास भी जरूरी है – निर्मला सीतारमण


मुंबई, हिंदी विवेक प्रकाशित ‘स्व 75’ ग्रंथ के विमोचन कार्यक्रम में शामिल होने देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन विशेष रूप से मुंबई के बांद्रा स्थित रंग शारदा ऑडिटोरियम पहुंची। इनके साथ ही समारोह के विशेष अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि भी यह अतिथि के रूप में पहुंचे। इस मौके पर जहां निर्मला सीतारमण कहा आज भारत का जनमानस स्व के प्रति जागरूक है। स्वतंत्रता के बाद कुछ विषयों में स्व जाग्रत हुआ लेकिन बहुत से क्षेत्रों में नहीं हुआ। दस साल पहले हम 11वें स्थान पर थे। तब भी ब्रिटेन 5वें स्थान पर था जबकि 1700 में वैश्विक उत्पादन में हमारा हिस्सा 23.5 प्रतिशत था जबकि आजादी के समय यह मात्र 3 प्रतिशत रह गया। स्वतंत्रता के बाद सबके विकास की धारणा रहती तो हम इस स्थान पर एकाध दशक पहले पहुंच जाते। विदेश से आयातित समाजवाद ने देश को काफी नुकसान पहुंचाया। कुछ लोग कहते हैं कि अंग्रेजों ने हमारा स्व जाग्रत किया जबकि वह पहले से जाग्रत था। हमें हमारी संस्कृति अर्थ के प्रति जागरूक रखती रही है। 1991 में जब उदारीकरण शुरू हुआ उस समय भी नियंताओं के मन में स्व का भाव नहीं था पर अटल जी की सरकार में अर्थ को व्यापकता मिली। उनके बाद दस सालों में मामला फिर ठप हो गया। इकोनामी को बर्बाद कर दिया। 2014 के बाद हमारे प्रधानमंत्री ने उसे दुरुस्त करने में तमाम उपाय किए। उनके खिलाफ अफवाहों का बाजार बनाया गया लेकिन वे जनता की भलाई से पीछे नहीं हटे। सरकार अंतिम व्यक्ति तक पहुंची। उक्त बातें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हिंदी विवेक द्वारा प्रकाशित ‘स्व 75’ ग्रंथ के विमोचन के अवसर पर कहीं। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि, मनरेगा का सही इस्तेमाल किया और वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच बनाई। तकनीक की वजह से भ्रष्टाचार का भी पता लग जाता है। आम आदमी को पूरा हक मिलता है। धारा 370 को लोग अडिग समझते थे। इसकी वजह से कश्मीर का विकास रुका हुआ था। लेकिन वर्तमान सरकार ने वहां की जनता के दर्द को समझा। बाल्मीकि समाज को वहां न्याय मिला। देश के विकास के लिए बड़े बैंक होने चाहिए और जिन व्यवसायों को जारी रखना सरकार के लिए आवश्यक न हो उन्हें बेचना जरूरी है। कोविड काल में भी देश के किसानों ने उत्पादन जारी रखा इसलिए हम आज भी हम अनाज और तिलहन का निर्यात कर रहे हैं। आज भारत पूरी दुनिया को 62 प्रतिशत वैक्सीन निर्यात कर रहा है। 2047 तक हम विकसित राष्ट्र का सपना देख रहे हैं तो वह सबके प्रयास से ही सम्भव है।
समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि ने कहा कि पिछले बारह सौ वर्षों में देश ने अनेक संघर्ष देखे। राष्ट्र की चिंता में संतों के चिंतन ने विशेष भूमिका निभाई। वर्तमान परिस्थितियां राष्ट्र के प्रगति की हैं, किसी के विरोध में नहीं। हमारी कोई हुई प्रतिष्ठा फिर से जगत में स्थापित हो रही है। वर्तमान सरकार राष्ट्र का विचार करती है, अपनी नहीं। मुंबई के विकास के लिए कम से कम 50 वर्षों का रोड मैप बनाना चाहिए। विवेक समूह के प्रबंध सम्पादक दिलीप करंबेलकर ने कहा कि भारत ने लोकतंत्र को स्वाभाविक गुणों की भांति आत्मसात कर लिया है। मुंबई भाजपा अध्यक्ष आशीष शेलार ने कहा कि स्वतंत्रता का आंदोलन स्व को प्राप्त करने की प्रक्रिया भी था, जिसे वर्तमान प्रधान मंत्री बख़ूबी आगे ले जा रहे हैं। मुंबई के विकास की परिकल्पना पुराने कानूनों के आधार पर किया गया, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। हिंदी विवेक के सीईओ अमोल पेडणेकर ने कहा कि, हिंदी विवेक का चिंतन राष्ट्र और व्यक्ति के विकास का है। यह ग्रंथ राष्ट्र के स्व का विशुद्ध प्रकटीकरण है। वैश्विक स्तर पर भारत एक नई भूमिका निर्वहन कर रहा है। महाशक्तियां शक्ति का इस्तेमाल शोषण के लिए करती हैं परंतु भारत की मंशा हमेशा से ही अलग रही है।
समारोह की शुरुआत अतिथियों द्वारा भारत माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। उसके पश्चात हिंदी विवेक के सीईओ अमोल पेडणेकर ने ग्रंथ की प्रस्तावना प्रस्तुत की। मंचासीन अतिथियों का स्वागत विवेक समूह के प्रबंध सम्पादक दिलीप करंबेलकर और सीईओ अमोल पेडणेकर ने किया, जबकि वित्त मंत्री ने यूपीएल के चेयरमैन रज्जूभाई श्राफ, कारुलकर प्रतिष्ठान के प्रशांत और शीतल कारुलकर, एसएफसी के चेयरमैन संदीप आसोलकर, उद्योगपति घनश्याम गोयल, समाज सेवक अजीत मन्याल और वरिष्ठ अधिवक्ता अमीत मेहता का स्मृति चिह्न, शाॅल और पुष्प गुच्छ देकर सम्मान किया। समारोह का सूत्र संचालन, वंदे मातरम् गायन और आभार प्रदर्शन हिंदी विवेक की कार्यकारी सम्पादक पल्लवी अनवेकर ने किया।

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Author: VS NATION