पुस्तक समीक्षा ———– ‘सनातन भारत’ की बहस पर विवेक का ग्रन्थ


हिंदी विवेक मासिक पत्रिका द्वारा प्रकाशित ‘सनातन भारत’ ग्रन्थ, ज्ञान-विज्ञान-विवेक का ऐसा त्रिवेणी संगम है, जिसमें जितना गहराई में उतरेंगे उतने ही ज्ञान के मोती की प्राप्ति होगी. सनातन भारत ग्रन्थ के ध्येय वाक्य ‘विश्व कल्याण का विशुध्द दृष्टिकोण’ से ही स्पष्ट हो जाता है कि यह ग्रन्थ केवल भारत के लिए ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के लिए समर्पित एवं प्राणिमात्र हेतु कल्याणकारी है.

भूमिका, अध्यात्म, प्रभाव, प्रगटीकरण, भविष्य और ध्वजवाहक, इन ६ खंडो में देश-विदेश से जुड़े मान्यवर लेखकों के सारगर्भित लेखों को प्रस्तुत किया गया है. कुल ५१ लेख, एक सम्पादकीय और ७ साक्षात्कार से समृद्ध ‘सनातन भारत’ गौरवशाली अतीत के साथ सुनहरे वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य की राह दिखाने वाला प्रेरणादायी, प्रासंगिक एवं संग्रहणीय ग्रन्थ है.

जो लोग यह कहते है कि सनातन तर्क एवं विज्ञान से परे है उनके लिए तथा खासकर युवाओं के लिए सनातन भारत ग्रन्थ तर्क और विज्ञान की कसौटी पर शत प्रतिशत खरा उतरा है. मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह ग्रन्थ अतीत से सिख देकर दूरदृष्टि का परिचय देते हुए वर्तमान एवं भविष्य संवारने में सहायक सिद्ध होगा. हमारी आनेवाली पीढ़ी, खासकर युवा वर्ग सनातन संस्कृति की जड़ों से गहरे जुड़े रहे और सनातन की शाश्वत शक्ति को जाने ताकि कोई विधर्मी गुमराह कर स्वधर्म से विमुख न कर सके. इसलिए सनातन भारत की संस्कृति तथा परम्पराओं को आनेवाली पीढ़ियों तक पहुंचानेवाले युवा ध्वजवाहकों को यह ग्रन्थ समर्पित है.

अतिथि सम्पादक के रूप में महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरी जी का आशीर्वचन तथा शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी, स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, स्वामी अवधेशानंद गिरी जी, स्वामी यतींद्रानंद गिरी जी, योग गुरु बाबा रामदेव, विख्यात गायक व संगीतकार पद्मश्री कैलाश खैर और पीताम्बरी प्रोडक्ट्स प्रा. लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर रविन्द्र प्रभु देसाई जी के साक्षात्कार में जीवन की सफलता के सूत्र और सनातन भारत का मर्म परिलक्षित होता है.

‘सनातन भारत’ हिंदी विवेक की ग्रन्थ प्रकाशन परम्परा का ही हिस्सा है. इसके पूर्व हिंदी विवेक द्वारा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के जीवनी पर आधारित ‘कर्मयोद्धा’, गृह मंत्री अमित शाह की जीवनी पर ‘महायोद्धा’ और मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवनी पर ‘संन्याशी योद्धा’ ग्रंथ प्रकाशित किया गया था. जिसे देश भर के पाठकों ने अभूतपूर्व प्रतिसाद दिया था.

‘सनातन भारत’ ग्रन्थ की प्रमुख विशेषता यह है कि इसे पढ़ने पर हमारी ज्ञान पिपासा बढ़ने लगती है और उत्सुकतावश एक ही बार में पूरा ग्रन्थ पढ़ने को मन लालायित हो उठता है. लेखकों ने भी सम्पूर्ण मनोयोग एवं समर्पण भाव से ‘गागर में सागर’ समाने वाला लेख लिखा है, जिसके लिए सभी लेखक तथा हिंदी विवेक की सम्पादकीय टीम अभिनंदन की पात्र है.

सनातन विचार, चिंतन एवं दृष्टिकोण को लेख एवं साक्षात्कार के माध्यम से इस तरह से प्रस्तुत किया गया है जो सदैव के लिए प्रासंगिक जान पड़ते है, इसलिए ‘सनातन भारत’ कालजयी ग्रंथ प्रतीत हो रही है. हर समस्या का समाधान, हर चुनौती को अवसर में परिवर्तित करने का सनातनी सूत्र इस ग्रन्थ में सहज ही मिल जाता है.

चाहे आतंकवाद से मुक्ति का मार्ग हो, चाहे विश्व शांति का, ईसाई धर्मांतरण का मायाजाल (षड्यंत्र) हो या इस्लामिक जिहाद, जहरीला वामपंथ, राष्ट्र धर्म विरोधी वैचारिक संघर्ष, रक्षा-सुरक्षा के सनातनी सूत्र, राष्ट्रीय एवं आंतरिक सुरक्षा आदि अनेकानेक विषयों सहित वर्तमान चुनौतियों का भी शाश्वत सनातनी समाधान इस ग्रन्थ में दिया गया है. इसके साथ ही ग्लोबल वार्मिंग से बचने हेतु पर्यावरण चेतना के साथ निसर्ग श्रद्धाभाव एवं पोषण की आवश्यकताओं पर भी बल दिया गया है.

रणनीति, सामरिक नीति, कूटनीति, राजनीति, विदेशनीति, अर्थनीति सहित दुनिया की आर्थिक व सैन्य महाशक्ति तथा भारत को विश्वगुरु बनाने का संकल्प समेत सनातन के ध्वजवाहक मोदी और योगी के योगदान को भी अधोरेखित किया गया है. हिंदी विवेक मासिक पत्रिका, हिन्दुस्थान प्रकाशन संस्था द्वारा ‘सनातन भारत’ ग्रन्थ का प्रकाशन किया गया है, जिसका मूल्य रु. ७०० मात्र है.
मुकेश गुप्ता

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Author: VS NATION