*स्पीड लॉक के नियम पर सह परिवहन आयुक्त जितेंद्र पाटील की मनमानी से हजारों ट्रांसपोर्टर्स मुसीबत में*


मुंबई, सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए 2018 में वाहनों में स्पीड लॉक यानी की स्पीड गवर्नर लगाने का सरकारी आदेश आया जिसमें यह कहा गया था कि वाहनों में यह स्पीड लॉक लगाने अनिवार्य है और हर 5 साल बाद इन्हें बदलने की बात भी कही गई थी। तभी सभी वाहनों में ये लगा दिए गए थे। अब 5 साल बाद वाहनों को पासिंग कराना था तो डिवाइस भी बदलने थे, प्रशासन ने सिर्फ 15 दिन का समय दिया सभी वाहनों में डिवाइस लगाने के लिए। शायद ट्रांसपोर्ट अपने वाहन में यह डिवाइस लगा भी लेते लेकिन सह परिवहन आयुक्त ने अपनी मनमानी करते हुए हजारों वाहन मालिकों को मुसीबत में डाल दिया है।

दरसल ये स्पीड ब्लॉक उपकरण (डिवाइस) बनाने वाली महाराष्ट्र में कंपनियां बहुत सारी है लेकिन जितेंद्र पाटील ने सिर्फ पांच कंपनियों को ही यह डिवाइस लगाने की अनुमति दी। जबकि 20कंपनियों ने ये डिवाइस लगाने के लिए निवेदन दिए थे। सह परिवहन आयुक्त की नासमझी वाले मनमाने रवैए ने आज हजारों ट्रांसपोर्टस को मुसीबत में डाल दिया है।
दूसरी ओर इन कंपनियों ने अपनी मोनोपली का लाभ लेते हुए 800 वाला डिवाइस 5000 में बेचना शुरू कर दिया ऐसे में बेचारा ट्रांसपोर्ट और मुसीबत में आ गया, हजारों गाड़ियां आर टी ओ के बाहर खड़ी है और यह पांच कंपनियां डिवाइस डिसटीब्यूट भी नहीं कर पा रही है। ट्रांसपोर्टर्स ने इस पूरे मसले पर राज्य सरकार से मांग की है कि डिवाइस लगाने की समय सीमा को बढ़ाया जाए, बाकी डिवाइस लगाने वाली कंपनियों को भी अनुमति दी जाए। ताकि यह जल्द से जल्द लग सके। कई संगठनों ने यह मांग पूरी ना होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
अब देखना यह है कि सह परिवहन आयुक्त जितेंद्र पाटील क्या फैसला लेते हैं।

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Author: VS NATION